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गौरेला: करोड़ों की लागत से बन रहे आदिवासी छात्रावास में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही गुणवत्ता? एस्टीमेट को ठेंगा दिखा रहा ठेकेदार?

क्या 'श्री मारुति कंस्ट्रक्शन' को मिली है खुली छूट?

गौरेला: करोड़ों की लागत से बन रहे आदिवासी छात्रावास में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही गुणवत्ता? एस्टीमेट को ठेंगा दिखा रहा ठेकेदार!

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ आदिवासियों के विकास के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। गौरेला विकासखंड में 1.90 करोड़ (190.70 लाख) की लागत से बन रहे 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का निर्माण कार्य विवादों के घेरे में है। निर्माण कार्य की हालत देखकर यह कहना मुश्किल है कि यह बच्चों के रहने के लिए बन रहा है या किसी बड़े हादसे को न्योता देने के लिए।

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सवाल जो खड़े करते हैं सिस्टम पर निशान?सरकारी एस्टीमेट का गला क्यों घोंटा जा रहा? जब किसी भी निर्माण के लिए एक मानक एस्टीमेट (SOR) तय किया जाता है, तो मौके पर उसके विपरीत कार्य क्यों हो रहा है? क्या ठेकेदार को तकनीकी मापदंडों की कोई परवाह नहीं है? गुणवत्ता विहीन सामग्री का जिम्मेदार कौन? मौके पर हो रहे कार्य में सीमेंट, रेत और छड़ का अनुपात क्या एस्टीमेट के अनुसार है? आखिर क्यों यह कार्य पहली नजर में ही “गुणवत्ता विहीन” नजर आ रहा है?

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सुपरवाइजर और इंजीनियर की चुप्पी का राज क्या है?

सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) कार्यालय से जारी कार्यदेश की शर्तों के अनुसार, कार्य की निगरानी करना विभागीय इंजीनियरों की जिम्मेदारी है। क्या यह भ्रष्टाचार इंजीनियरों और ठेकेदार की मिलीभगत से फल-फूल रहा है?

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क्या ‘श्री मारुति कंस्ट्रक्शन’ को मिली है खुली छूट?

कोरबा की इस फर्म को कार्य का ठेका दिया गया है, लेकिन क्या प्रशासन ने इन्हें गुणवत्ता से समझौता करने का लाइसेंस दे दिया है? नियम कहते हैं कि कार्य तत्काल और मानक के अनुसार होना चाहिए, फिर इतनी लापरवाही क्यों?

करोड़ों का बजट, पर कागजों तक सीमित विकास!

दस्तावेजों के अनुसार, 17 अक्टूबर 2025 को जारी इस कार्यदेश में स्पष्ट लिखा है कि कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप होना चाहिए। लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। यदि अभी से निर्माण की गुणवत्ता ऐसी है, तो भविष्य में इसमें रहने वाले आदिवासी छात्रों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होगा?प्रशासन को चाहिए कि तत्काल इस निर्माण कार्य की टेक्निकल ऑडिट कराई जाए और दोषी ठेकेदार के साथ-साथ आंख मूंदकर बैठे अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो।आदिवासी विकास के नाम पर हो रहे इस “खेल” पर हमारी नजर बनी रहेगी। देखते रहिए लल्लनगुरु न्यूज़

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